बादल हों या रात, रडार उपग्रह जमीन से लौटने वाले संकेत ले सकता है। NASA और ISRO का साझा NISAR इसी तकनीक से जंगल, आर्द्रभूमि, बर्फ और जमीन में बदलाव का अध्ययन करता है। जुलाई 2026 में इस मिशन का नया चरण पाठकों से अधिक शोधकर्ताओं के काम का है: दोनों संस्थाओं ने डेटा उत्पाद सार्वजनिक पहुंच में जारी किए हैं।
NASA/JPL के मुताबिक L-band के calibrated उत्पादों की लगातार सार्वजनिक रिलीज 20 जुलाई से शुरू हुई। ISRO ने 24 जुलाई को बताया कि S-band के रोज संसाधित उत्पाद Bhoonidhi पोर्टल पर उपलब्ध हैं। ये अलग तरंगदैर्घ्य वाले रडार संकेत हैं, जिनसे धरती की सतह और वनस्पति के अलग गुण पढ़े जा सकते हैं।
एक ही जगह को बार-बार देखना
NISAR ने 30 जुलाई 2025 को उड़ान भरी थी। इसका 12 मीटर का रिफ्लेक्टर लगभग 240 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र से संकेत लेने में मदद करता है। दोहराव का चक्र 12 दिन का है। एक ही क्षेत्र के अलग तारीखों के डेटा से बदलाव की श्रृंखला तैयार की जा सकती है।
ISRO के उदाहरणों में 9 जुलाई 2026 का ब्रह्मपुत्र क्षेत्र शामिल है। उसमें पानी की चिकनी सतह, वनस्पति वाले बाढ़मैदान और दूसरी जमीन अलग रडार प्रतिक्रियाओं में दिखती हैं। ये दृश्य सामान्य कैमरे की तस्वीरें नहीं हैं। रंग संकेतों के प्रकार को दिखाने के लिए लगाए जाते हैं; उन्हें आंखों से दिखाई देने वाला वास्तविक रंग नहीं समझना चाहिए।
डेटा मिलता कहां है
S-band उत्पादों के लिए पंजीकृत उपयोगकर्ता Bhoonidhi पर क्षेत्र, तारीख और उत्पाद का प्रकार चुनकर खोज तथा डाउनलोड कर सकते हैं। L-band डेटा की उपलब्धता और उपयोग की जानकारी NASA के Alaska Satellite Facility पन्नों पर है। यह तकनीकी शोध सामग्री है, अपने आप तैयार बाढ़-पूर्वानुमान या स्थानीय वन-रिपोर्ट नहीं।
NASA ने शुरुआती रिलीज को provisional बताया है: उपकरण का समायोजन हो चुका है, लेकिन अलग स्थानों पर सत्यापन अभी सीमित है। ISRO ने कुछ कम संकेत वाले हिस्सों में धारियां और रेडियो हस्तक्षेप के अवशेष रह सकने की जानकारी दी है। आगे के संस्करणों में सुधार अपेक्षित है।
पर्यावरण अध्ययन में इस खुले डेटा का महत्व दोहराए जा सकने वाले मापन में है। जंगल या जलाशय के बारे में निष्कर्ष निकालते समय रडार रिकॉर्ड को स्थानीय भूभाग, मौसम और जमीन पर लिए गए मापों के साथ पढ़ना होगा।
मुख्य बातें
- NASA/JPL ने 20 जुलाई 2026 से calibrated L-band उत्पाद जारी करना शुरू किया।
- ISRO ने 24 जुलाई को S-band डेटा Bhoonidhi पर उपलब्ध होने की जानकारी दी।
- डेटा में कुछ त्रुटियों और सीमित validation का उल्लेख है; स्थानीय निष्कर्ष के लिए जमीन की जानकारी भी जरूरी है।
स्रोत और संदर्भ
- NASA / JPL-Caltech · US-India Satellite Delivers Data, Reveals Hummingbird in Antarctica ↗21 जुलाई 2026
- ISRO · NISAR S-Band SAR Data Products Release ↗24 जुलाई 2026
- NASA / Alaska Satellite Facility DAAC · Available NISAR Data ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- ISRO · NISAR Mission / Science Phase ↗28 नवंबर 2025
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



