खेती में बदलाव केवल फसल बदलने से नहीं, बल्कि खेती से जुड़े अलग-अलग आय स्रोतों को एक-दूसरे से जोड़ने से भी आता है। बालाघाट जिले के लांजी विकासखंड के ग्राम बड़गांव निवासी किसान घनश्याम पारधी पिता जीवनलाल पारधी ने इसी सोच को अपनाकर अपनी खेती को नई दिशा दी है। कभी केवल धान की खेती पर निर्भर रहने वाले घनश्याम आज धान के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी को अपनाकर समन्वित कृषि की मिसाल बन गए हैं।
पहले धान की खेती, अब आय के कई साधन
घनश्याम बताते हैं कि पहले वे केवल धान की खेती करते थे। खेती से होने वाली आमदनी सीमित थी और आय मुख्य रूप से एक ही फसल पर निर्भर रहती थी। मौसम या फसल से जुड़ी परिस्थितियों का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ता था। समय के साथ उन्होंने खेती को पारंपरिक तरीके से करने के बजाय समन्वित कृषि प्रणाली को अपनाने का निर्णय लिया। धान की खेती के साथ उन्होंने पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी को जोड़ा। इससे उनके खेत और उससे जुड़े संसाधनों का बेहतर उपयोग होने लगा तथा आय के नए रास्ते भी खुले।
समन्वित कृषि प्रणाली का फायदा यह हुआ कि घनश्याम अब केवल धान की फसल पर निर्भर नहीं हैं। फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी से उन्हें अलग-अलग समय पर आमदनी प्राप्त होती है। इस व्यवस्था ने खेती को उनके लिए केवल मौसमी गतिविधि न रखकर सालभर चलने वाले आय के साधन में बदलने में मदद की है।घनश्याम कहते हैं, “पहले की स्थिति अलग थी, आज स्थिति बदल गई है।
अब मुझे लाभ हो रहा है और मैं इससे बहुत खुश हूं।” उनके अनुसार, अलग-अलग कृषि गतिविधियों को एक-दूसरे से जोड़ने से खेती का जोखिम कम करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलती है। अब वे अपनी मेहनत का लाभ पहले की तुलना में बेहतर तरीके से प्राप्त कर पा रहे हैं।
घनश्याम बताते हैं कि समन्वित कृषि को अपनाने में उन्हें शासन की योजनाओं से भी सहयोग मिला। उन्होंने शासन की योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया है।
घनश्याम पारधी की कहानी यह संदेश देती है कि खेती को केवल एक फसल तक सीमित रखने के बजाय उपलब्ध संसाधनों के अनुसार फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। लांजी क्षेत्र के किसान घनश्याम ने अपनी मेहनत और नई कृषि पद्धति को अपनाकर यह दिखाया है कि समन्वित कृषि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में प्रभावी माध्यम बन सकती है। उनकी सफलता अन्य किसानों को भी पारंपरिक एकल फसल प्रणाली से आगे बढ़कर कृषि के विविध आयामों को अपनाने की प्रेरणा दे रही है।
