जमीन के झगड़े के लिए तहसील और थाने के बार-बार चक्कर लगाने की जगह अगर अदालत खुद गांव पहुंच जाए, तो क्या होता है? गुना जिले ने इसका जवाब ‘मोबाइल कोर्ट’ के रूप में दिया है, और अब इस पहल को राष्ट्रीय पहचान मिली है।

नई दिल्ली में हुए 109वें स्कोच समिट 2026 में गुना के राजस्व विभाग की ‘मोबाइल कोर्ट’ पहल को ‘फाउंडेशन ऑफ इन्क्लूसिव ग्रोथ’ श्रेणी में स्कोच अवार्ड दिया गया। सम्मान कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को मिला, जिसे उनकी ओर से एसडीएम अमित सोनी और तहसीलदार देवदत्त गोलिया ने ग्रहण किया।

कैसे काम करती है मोबाइल कोर्ट

इस पहल में राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर भूमि संबंधी मामलों की सुनवाई करते हैं और वहीं निराकरण की कोशिश करते हैं। लंबे समय से लंबित विवादों को पक्षकारों की आपसी सहमति से सुलझाने पर भी जोर दिया गया है।

जिला प्रशासन के अनुसार अब तक 424 से अधिक मामलों का निराकरण किया जा चुका है। लोगों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़े हैं और समय पर फैसलों से जमीन के विवाद घटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिली है।

दूसरे जिलों के लिए मॉडल

प्रशासन इस सम्मान को नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और स्थानीय समस्याओं के नवाचारी समाधान की पहचान मान रहा है। ग्रामीण इलाकों में जमीन के विवाद सबसे आम समस्याओं में हैं, इसलिए यह मॉडल दूसरे जिलों के लिए भी देखने लायक है।